गोपनीयता की आड़ में इस परियोजना में चल रहा फर्जीवाड़ा

गोपनीयता की आड़ में इस परियोजना में चल रहा फर्जीवाड़ा

बिलासपुर- जिले के शहरी क्षेत्र में एडस ने इस तेजी से हाथ पैर फैलाए हैं इसका आकलन करना आसान नहीं है बल्कि बहुत ही मुश्किल है। सबसे पहले संबंधित कार्य करने वाली एजेंसियां निजता के नाम पर जानकारी देने से मना करती है यदि जानकारी प्राप्त करने वाला देने वाले को यह समझा भी दे कि नाम का पहचान गुप्त रखना है प्रभावितों की संख्या से इसका कोई लेना देना नहीं है तब भी योजना के अंतर्गत काम करने वाले जानकारी नहीं देना चाहते इसके पीछे छिपा हुआ उद्देश्य अपनी संस्था के झोल को छिपाना है

बताया जाता है कि ओम नगर क्षेत्र में लक्ष्यगत हस्तक्षेप परियोजना का दफ्तर कार्यरत है। इसका पूरा स्टाफ पत्रकार व पत्रकारों के प्रश्नों से बचना चाहता है ऑफिस पहली मंजिल पर स्थित है दफ्तर के दरवाजे के सामने ही उपयोग किए गए इंजेक्शन व सिरिंज दर्जनों की संख्या में पडे दिखाई देते हैं। यह सब उपयोग किए गए होते हैं ऊपर डिब्बे में नए सिरिंज रखे रहते हैं। जिसे कोई भी व्यक्ति उठा कर ले जा सकता है। उक्त कार्यालय पर सिर्फ इतनी सूचना लिखी है कि जो व्यक्ति इंजेक्शन ले जाएगा वह उपयोग किए गए इंजेक्शन दूसरे डिब्बे में डाल कर जाएगा किंतु इस नियम का कितने लोग पालन करते है इसका पता नहीं। क्योंकि उपयोग किए गए इंजेक्शन को कार्यालय के नीचे दरवाजे पर पड़े देखे जाते हैं जिस क्षेत्र में इस परियोजना का दफ्तर संचालित है उस क्षेत्र से लगे हुए मोहल्ले में बिलासपुर शहर का सबसे अधिक ड्रग कारोबार होता है और इसी मोहल्ले में नशेड़ीओ की सबसे बड़ी संख्या रहती है

कहा जाता है कि एड्स फैलने की सर्वाधिक संभावना इंजेक्शन से नशा लेने वालों के बीच होती है। परियोजना के संबंध में दफ्तर में उपस्थित लोग कुछ भी कहना नहीं चाहते। बिलासपुर में एक पीड़ित पुरुष महिलाओं की संख्या भी बताते हैं जबकि अपुष्ट सूत्रों के अनुसार बिलासपुर शहर मे 140 पुरुष और 100 महिलाएं एड्स पीड़ित हैं। इस परियोजना में लाखो ,करोड़ों रुपए की फंडिंग सरकार द्वारा किया जाता है कहा जाता है एड्स पर बातचीत करें जिससे सही जानकारी जनहित में निकले लेकिन यहां तो हर चीज पर्दे के पीछे रखी जाती है उद्देश्य एड्स पीड़ितों का पहचान छुपाना नहीं है बल्कि इनका मूल उद्देश्य है अपनी संस्था का भ्रष्टाचार छुपाना है

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