अनुविभागीय दंडाधिकारी के आदेश की हो रही अवहेलना, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र मामले पर 15 दिन बाद भी नहीं हुई एफ. आई. आर. दर्ज आखिर किस अधिकारी के संरक्षण पर तहसील कार्यालय में सक्रिय है फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाला दलाल

अनुविभागीय दंडाधिकारी के आदेश की हो रही अवहेलना, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र मामले पर 15 दिन बाद भी नहीं हुई एफ. आई. आर. दर्ज

आखिर किस अधिकारी के संरक्षण पर तहसील कार्यालय में सक्रिय है फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाला दलाल

न्यूज़ बिलासपुर बंधु (संतोष साहू)

बिलासपुर – फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले व्यक्ति (दलाल) के खिलाफ अनुविभागीय दंडाधिकारी ने एफ. आई. आर दर्ज कराने का निर्देश दिया था। लेकिन उनका यह आदेश बेअसर होता नजर आ रहा है। अपराध पंजीबद्ध कराने के लिए दिए गए आदेश को आज 15 दिन बीत चुका है लेकिन संबंधित जवाबदार अधिकारी ने अब तक एफ. आई. आर .दर्ज नहीं कराया है। इसलिए फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले दलाल पुनः तहसील कार्यालय पर सक्रिय हो गए है। और पूरे दमखम के साथ कार्यालय पर आने वाले भोले भाले जनता को ठग कर अपने मंसूबों को बेधड़क अंजाम दे रहे है।

गौरतलब है कि हमने पाठकों को पिछले अंक पर बताया था कि न्यायधानी पर नेहरू चौक के पास तहसील कार्यालय बिलासपुर स्थित है। जहां वर्षों से दलाल सक्रिय हैं। और अपने आपको अंगद के पांव की तरह विस्थापित कर लिया है। उनका हर कार्य में दखल रहता है। जिसका दुष्परिणाम समय-समय पर देखने को ही मिलता है। ऐसा ही एक मामला देखने को मिला है जिसमें की दलालों के द्वारा भोली-भाली आम जनता से मोटी रकम लेकर उन्हें फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र थमा दिया गया है। जिसमें बकायदा न्यायिक कार्यपालिका दंडाधिकारी बिलासपुर का सील साइन लगाया गया है।इस तरह के काम कराने के मामले में दलालों को महारत हासिल है। लेकिन चोरी तो चोरी होती है चाहे वह रकम,सामान की चोरी हो या फिर पदनाम की चोरी हो । चोरी करते हुए चोर किसी ना किसी दिन पकड़ में ही जाता है ठीक उसी तरह दलालों के द्वारा फर्जीवाड़ा कर कार्यपालिका दंडाधिकारी का पदनाम चोरी कर फर्जी सील मोहर तैयार करके लोगों को चूना लगाया जा रहा था। जिसके बारे में विभाग के उच्च अधिकारियों को शिकायतकर्ता ने लिखित शिकायत के माध्यम से मामले को अवगत कराया। और शिकायत के बाद जांच बैठ गया।

शिकायत में बताया गया कि इस कार्यालय पर पदस्थ अधिकारी के फर्जी तरीके से सील मोहर का उपयोग कर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाया गया है। यह मृत्यु प्रमाण पत्र एक, दो दर्जन नही है बल्कि इसकी संख्या सैकड़ों पर हैं। फर्जीवाड़ा का अनुमान सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है पिछले 6 महीनों में ही न्यायिक कार्यपालिका दंडाधिकारी बिलासपुर के सील मोहर से लगभग 185 फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र आदेश जारी हुए हैं। जिनका पूरा प्रकरण तहसील कार्यालय बिलासपुर में उपलब्ध नहीं है।

शिकायतकर्ता ने मामले पर 20 मृत्यु प्रमाण पत्रों की जांच के लिए माँग किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुविभागीय दंडाधिकारी पुलक भट्टाचार्य ने जांच का जिम्मा तहसीलदार रमेश मौर्य को दिया। मामले पर तत्परता दिखाते हुए महज 2 दिनों में ही तहसीलदार ने जांच पूर्ण कर रिपोर्ट अनुविभागीय दंडाधिकारी को सौंप दिया। जिसके बाद एसडीएम ने निगम आयुक्त को पत्र लिखकर मामले पर एफ. आई .आर दर्ज कराने एवं फर्जी प्रमाण पत्र को निरस्त करने के लिए आग्रह किया है।

इसके अलावा अतिरिक्त तहसीलदार राजकुमार साहू को पत्र प्रेषित कर यह कहा गया कि किसी के द्वारा आपके फर्जी हस्ताक्षर से जन्म /मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया है। अतः आप उक्त व्यक्ति के विरुद्ध संबंधित थाने में एफ. आई .आर दर्ज कराने सुनिश्चित करें। लेकिन आज 15 दिन बीत जाने के बाद भी अतिरिक्त तहसीलदार राजकुमार साहू ने संबंधित मामले पर किसी भी थाने एफ .आई .आर. दर्ज नहीं कराया है।

वहीं दूसरी ओर इतने गंभीर मामले पर किसी प्रकार की कार्यवाही ना होता देख दलालों के हौसले बुलंद है और वह पुनः तहसील कार्यालय पर सक्रिय होकर अपना कार्य कर रहे है। वही तहसील कार्यालय पर चर्चा है कि इन दलालों को एक राजस्व अधिकारी का भी संरक्षण है। हम अगले अंक पर उस अधिकारी का नाम जरुर लिखेंगे जिन्होंने दलालों को संरक्षण दे रखा है। और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र मामले पर उस अधिकारी की भी प्रमुख भूमिका है। जो पर्दे के पीछे अब तक बैठे हुए हैं।

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