नगर पालिक निगम पर बरसों से अंगद के पांव की तरह जमे हैं अधिकारी, मंत्रालय से ट्रांसफर होने के बाद भी नहीं छूट रहा मोह

नगर पालिक निगम पर बरसों से अंगद के पांव की तरह जमे हैं अधिकारी, मंत्रालय से ट्रांसफर होने के बाद भी नहीं छूट रहा मोह

न्यूज़ बिलासपुर बंधु (संतोष साहू)
बिलासपुर- न्यायधानी पर नगर पालिक निगम विभाग में एक से बढ़कर एक साहब पदस्थ है जिनका सिक्का बिलासपुर से रायपुर तक चलता है। जिनके सामने बड़े-बड़े नेता मंत्री भी पानी भरते हैं। भले ही यह साहबो ने बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की धरती को चीर – चीर कर बेतरतीब तरीके से खोद डाला और जिला को खोदापुर में तब्दील कर दिया। और कुछ अधिकारियों ने तो खोदापुर प्रोजेक्ट पर काम करके भ्रष्टाचार को अंजाम देकर अपने लिए कई जगह आलीशान बंगला तैयार कर लिया है। और उसे किराए पर चढ़ा कर लाखों रुपए महीना कमा रहे हैं। लेकिन इतना सब कुछ करने के बाद भी कुछ भ्रष्ट साहबो का जी अभी नहीं भरा है। इसीलिए तो मंत्रालय से स्थानांतरण आदेश आने के बाद भी बिलासपुर को चारागाह समझने वाले कुछ अधिकारी यहां से जाना नहीं चाह रहे हैं। और जिले में ही रह कर अपना सिक्का(खोटा वाला) चलाना चाह रहे है। जिन्हें बिलासपुर की आम जनता पसंद नहीं करती है। क्योंकि इन्हीं साहबो कि मेहरबानी से बिलासपुर कि जनता को सालों से अन्न के साथ धूल खाना पड़ा है।

गौरतलब है कि नगरी प्रशासन विभाग ने सितंबर 2021 को प्रदेशभर में कार्यरत नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर पालिक निगम के अंतर्गत इंजीनियर व सब इंजीनियर का स्थानांतरण आदेश जारी किया था। जिसके तहत नगर पालिक निगम बिलासपुर में कार्यरत इंजीनियरों का भी ट्रांसफर किया गया था। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बिलासपुर नगर निगम से 12 इंजीनियर का स्थानांतरण किया गया था। जिसमें 7 अधिकारियों को रिलीव करना बताया जा रहा है। बाकी शेष 5 अधिकारियों में से 1 अधिकारी का संशोधित आदेश आने की चर्चा है। इन दिनों निगम के दफ्तरों पर चर्चाएं जोरों पर है कि बाकी अन्य अधिकारी अपना स्थानांतरण आदेश को संशोधित आदेश में परिवर्तित करने का जुगाड़ में लगे हैं। संभवत उनका यह प्रयास सफल भी हो सकता है। क्योंकि जो बचे अधिकारी हैं वह पुराने व मंजे हुए खिलाड़ी है। क्योंकि पूर्व में भी मंत्रालय से इस तरह से आये स्थानांतरण आदेश को एक सब इंजीनियर ने धत्ता दिखा दिया था।

नगर पालिक निगम बिलासपुर में एक ऐसा होनहार सब इंजीनियर है। जो मंत्रालय से स्थानांतरण आदेश होने के बाद भी पिछले तीन वर्षों से अपने उच्च अधिकारियों से सांठगांठ कर जिले में ही कार्यरत है। बताया जाता है कि वर्ष 2019 में उक्त अधिकारी का स्थानांतरण चंद्रपुर नगर पंचायत में किया गया था। लेकिन उन्होंने मंत्रालय के आदेश के खिलाफ जाकर माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष स्थगन आदेश प्राप्त करने हेतु आवेदन दिया था। लेकिन ऐसी चर्चाएं हैं कि उक्त आवेदन पर माननीय उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश देने से इनकार कर दिया था। लेकिन सब इंजीनियर साहब तो ठहरे पुराने मंझे हुए खिलाड़ी उन्होंने मंत्रालय के आदेश को धत्ता दिखाते हुए अपने उच्च अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर अपना स्थानांतरण को पुनः यथास्थिति करा लिया। और शानदार 2 वर्ष को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कार्य कर चुपके से बिता दिया। इसके बाद वर्तमान में सितंबर माह 2021 को विभाग ने मंत्रालय स्तर से बड़े पैमाने पर थोक के भाव में प्रदेश भर में नगर पंचायत, नगर पालिक, व नगर पालिक निगम में कार्यरत इंजीनियर, व सब इंजीनियर का तबादला किया था। जिसमें उक्त अधिकारी का स्थानांतरण जैय जैयपुर होना बताया जा रहा है। लेकिन पिछले बार की तरह इस बार भी इस सब इंजीनियर के ऊपर कुछ अधिकारी मेहरबान है इसलिए उन्हें रिलीव नहीं किया गया है। जबकि स्थानांतरण आदेश पर स्पष्ट उल्लेख था कि ट्रांसफर किए गए अधिकारियों को 1 सप्ताह के अंदर हर हाल में रिलीव करना है। अगर उक्त अधिकारी का वेतन पूर्व में पदस्थ कार्यालय से भुगतान किया जाता है तो नियंत्रण करता अधिकारी की जवाबदारी होगी। लेकिन बावजूद इसके सब इंजीनियर को रिलीव नहीं किया गया है विभाग की गलियारों पर चर्चा है कि यह साहब पुनः अपना स्थानांतरण आदेश रुकवाने की फिराक में है। बहर हाल देखने वाली बात होगी कि हमारे समाचार के बाद संबंधित विभाग किस तरह की कार्यवाही करता है।

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