माननीय उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश हटने के बाद भी फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले पर नहीं हुई कार्यवाही फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारक सहकारिता विस्तार अधिकारी पर क्यों मेहरबान है मंत्रालय के अधिकारी सहकारिता विस्तार अधिकारी बिंद के हौसले बुलंद, कार्यवाही नहीं होने के कारण क्या ?

माननीय उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश हटने के बाद भी फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले पर नहीं हुई कार्यवाही

 फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारक सहकारिता विस्तार अधिकारी पर क्यों मेहरबान है मंत्रालय के अधिकारी

सहकारिता विस्तार अधिकारी बिंद के हौसले बुलंद, कार्यवाही नहीं होने के कारण क्या ?

न्यूज़ बिलासपुर बंधु (संतोष साहू)

बिलासपुर- फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले पर फंसे एक अधिकारी ने माननीय उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश ले रखा था। जिस पर शीघ्र सुनवाई के लिए माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष आवेदक ने पुनः आवेदन प्रस्तुत कर आग्रह किया गया। जिस पर विचार करते हुए माननीय न्यायालय ने उक्त अधिकारी का स्थगन आदेश निरस्त कर दिया। लेकिन स्थगन आदेश हटने के बाद भी अब तक उस अधिकारी के खिलाफ किसी प्रकार की विभागीय कार्यवाही नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि न्यूज़ बिलासपुर बंधु ने अपने पिछले अंक पर पाठको को बताया था कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बयान दिया था कि ऐसे अधिकारी ,कर्मचारी जो फर्जी जाति एवं गलत प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे हैं उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही कर उन्हें बर्खास्त किया जाए एवं जिन लोगों ने न्यायालय के स्टे ले रखा है उनके मामले में शीघ्र सुनवाई करने के लिए माननीय न्यायालय से आग्रह किया जाए। और फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वालों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाही किया जाए। लेकिन उनका यह आदेश बिलासपुर पर बेअसर होता नजर आ रहा है।

न्यायधानी पर फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे लंबे समय से कार्यालय उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं बिलासपुर के अंतर्गत विभाग पर एक ब्लॉक में सहकारिता विस्तार अधिकारी के पद गोपाल प्रसाद बिंद कार्यरत है।आरोप है कि सन 1982 में नयाब तहसीलदार बिलासपुर के समक्ष कूट रचित दस्तावेज प्रस्तुत कर गोपाल प्रसाद बिंद (सहकारिता विस्तार अधिकारी) ने अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया है। जबकि वह पिछड़ा वर्ग कि एक जाति के अंतर्गत आते है। लेकिन उसने कूट रचित दस्तावेज के सहारे फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाने में कामयाब हो गया। और वहां अनुसूचित जनजाति आरक्षण का लाभ लेकर लंबे समय से विभाग पर कार्यरत है जिसकी शिकायत विभाग के उच्च अधिकारियों को किया गया था। जिस पर विभाग ने संज्ञान लेते हुए जांच का आदेश दिया था।

जांच के आदेश के परिपालन पर जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय समिति द्वारा जांच कमेटी का गठन किया गया था जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष ,सचिव व 2 सदस्य कुल मिलाकर 5 सदस्य टीम बनाई गई थी । उक्त जांच कमेटी ने जांच पूर्ण कर दिनांक 31-3- 2016 को गोपाल प्रसाद बिंद के द्वारा कूट रचित कर बनवाएं गए (भील जाति) अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया। और अपनी रिपोर्ट संबंधित विभाग को सौंप दिया। जिसके बाद विभाग ने अपने उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत कराते हुए बताया कि उक्त अधिकारी फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे विभाग पर कार्यरत है जिसकी शिकायत उपरांत जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने उनकी जाति को निरस्त कर दिया है जिसकी जानकारी पत्र के माध्यम से पंजीयक सहकारी संस्थाएं छत्तीसगढ़ नया रायपुर को दिया गया

इसी बीच सहकारिता विस्तार अधिकारी गोपाल प्रसाद बिंद ने मामले को माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष रखकर स्थगन आदेश वर्ष 2020 में प्राप्त कर लिया था। आवेदक ने स्थगन आदेश निरस्त करने के लिए माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर आग्रह किया गया। जिस पर वर्ष 2021 में माननीय न्यायालय ने गोपाल प्रसाद बिंद को दिया गया स्थगन आदेश निरस्त कर दिया। स्थगन आदेश निरस्त की जानकारी विभाग के सचिव, जिला कलेक्टर और सहकारिता विस्तार अधिकारी गोपाल प्रसाद बिंद को दिया गया। विगत कुछ दिनों पहले मामले पर जब मीडिया ने गोपाल प्रसाद बिंद से जानकारी लिया तब उन्होंने यह बताया कि मैं माननीय उच्च न्यायालय से स्थगन पर हूं लेकिन उनका स्थगन आदेश निरस्त किया जा चुका है इस बात की जानकारी उन्होंने मीडिया से छुपाई थी।माननीय उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश हटने के बाद भी सहकारिता विस्तार अधिकारी गोपाल प्रसाद बिंद के खिलाफ अब तक किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं हो पाई है। जिससे प्रदेश में बैठे उच्चअधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठता है।फिलहाल देखने वाली बात होगी कि हमारे समाचार के बाद विभाग किस तरह कार्यवाही करता है।

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