कांग्रेस भाजपा दोनों पर भारी, सहकारिता विस्तार अधिकारी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा दिया गया बयान फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वाले होंगे बर्खास्त, होता नजर आ रहा बेअसर सहकारिता विस्तार अधिकारी के आगे शासन भी नतमस्तक क्या ?

कांग्रेस भाजपा दोनों पर भारी, सहकारिता विस्तार अधिकारी

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा दिया गया बयान फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वाले होंगे बर्खास्त, होता नजर आ रहा बेअसर

सहकारिता विस्तार अधिकारी के आगे शासन भी नतमस्तक क्या ?

न्यूज़ बिलासपुर बंधु (संतोष साहू)

बिलासपुर – छत्तीसगढ़ प्रदेश में सरकार तो बदल गई है लेकिन फर्जी की मर्जी अभी भी चल रही है। भाजपा के शासनकाल में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के खिलाफ किए गए शिकायत का निपटारा कांग्रेस शासनकाल आने के बाद भी नहीं हो पाया है। गौरतलब है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बयान दिया था कि ऐसे अधिकारी ,कर्मचारी जो फर्जी जाति एवं गलत प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे हैं उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही कर उन्हें बर्खास्त किया जाए एवं जिन लोगों ने न्यायालय के स्टे ले रखा है उनके मामले में शीघ्र सुनवाई करने के लिए माननीय न्यायालय से आग्रह किया जाए। और फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वालों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से कार्रवाही किया जाए। लेकिन उनका यह आदेश बिलासपुर पर बेअसर होता नजर आ रहा है।

न्यायधानी पर फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे लंबे समय से एक अधिकारी कार्यालय उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं बिलासपुर के अंतर्गत विभाग पर कार्यरत है।और इन दिनों न्यायधानी में ही पदस्थ है। बताया जाता है कि वह अधिकारी सालों से बिलासपुर जिला अंतर्गत एक ब्लॉक पर सहकारिता विस्तार अधिकारी के पद पर कार्यरत है। जिसकी शिकायत विभाग के उच्च अधिकारियों को किया गया था लेकिन फिलहाल अभी मामला दाखिले दफ्तर हो चुका है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में आदिवासियों को प्रदेश का मूल निवासी माना जाता है। साथ ही उन्हें आर्थिक व शैक्षणिक दृष्टि से कमजोर व पिछड़ा माना जाता रहा है। इसीलिए उनकी आर्थिक व शैक्षणिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से शासकीय नौकरियों पर उन्हें लाभ मिल सके इसलिए आरक्षण के आधार पर खासा छूट शासन ने प्रदान किया है। ताकि वह आरक्षण का लाभ लेकर आसानी से नौकरी प्राप्त करें और अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार ला सके। लेकिन आरक्षण का लाभ वास्तविक में आदिवासियों को कितना प्राप्त हुआ है यह बता पाना थोड़ा मुश्किल है। वही कुछ लोग पिछड़ा वर्ग होते हुए भी फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र बनवा लेते हैं और उसका दुरुपयोग कर उस प्रमाण पत्र के सहारे आसानी से शासकीय नौकरियां प्राप्त कर लेते हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण इन दिनों कार्यालय उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं बिलासपुर पर कार्यरत एक अधिकारी को देखा जा सकता है।

सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेज के अनुसार गोपाल प्रसाद बिंद की प्रथम नियुक्ति उप अंकेक्षण के पद पर किया गया था। वह पिछले 31 सालों से विभाग पर कार्यरत है और पदोन्नति प्राप्त कर इन दिनों बिलासपुर जिला के एक ब्लॉक पर सहकारिता विस्तार अधिकारी का दायित्व निभा रहे है। आरोप है कि सन 1982 में नयाब तहसीलदार बिलासपुर के समक्ष कूट रचित दस्तावेज प्रस्तुत कर गोपाल प्रसाद बिंद (सहकारिता विस्तार अधिकारी) ने अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया है। जबकि वह पिछड़ा वर्ग कि एक जाति के अंतर्गत आते है। लेकिन उसने कूट रचित दस्तावेज के सहारे फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाने में कामयाब हो गया। और वहां अनुसूचित जनजाति आरक्षण का लाभ लेकर लंबे समय से विभाग पर कार्यरत है जिसकी शिकायत विभाग के उच्च अधिकारियों को किया गया था। जिस पर विभाग ने संज्ञान लेते हुए जांच का आदेश दिया था।

जांच के आदेश के परिपालन पर जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय समिति द्वारा जांच कमेटी का गठन किया गया था जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष ,सचिव व 2 सदस्य कुल मिलाकर 5 सदस्य टीम बनाई गई थी । उक्त जांच कमेटी ने जांच पूर्ण कर दिनांक 31-3- 2016 को गोपाल प्रसाद बिंद के द्वारा कूट रचित कर बनवाएं गए (भील जाति) अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया। और अपनी रिपोर्ट संबंधित विभाग को सौंप दिया। जिसके बाद विभाग ने अपने उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत कराते हुए बताया कि उक्त अधिकारी फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे विभाग पर कार्यरत है जिसकी शिकायत उपरांत जाति प्रमाण पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने उनकी जाति को निरस्त कर दिया है जिसकी जानकारी पत्र के माध्यम से पंजीयक सहकारी संस्थाएं छत्तीसगढ़ नया रायपुर को दिया जा चुका है। लेकिन अब तक गोपाल प्रसाद बिंद सहकारिता विस्तार अधिकारी के खिलाफ किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई है। या फिर यूं कहें कि उक्त अधिकारी के आगे विभाग के उच्च अधिकारी भी नतमस्तक है।

फर्जी दस्तावेज से संबंधित कुछ मामले ऐसे भी हैं जो माननीय न्यायालय के समक्ष लंबित है विभाग को आवश्यकता है कि ऐसे फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वाले व्यक्ति के खिलाफ माननीय न्यायालय से शीघ्र सुनवाई करने का आग्रह करे। और न्यायालय से आदेश आने के उपरांत बिना विलंब किए उचित विभागीय कार्यवाही करें। साथ ही फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ संबंधित थाना में विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कराया जाए।

गोपाल प्रसाद बिंद (सहकारिता विस्तार अधिकारी)

माननीय उच्च न्यायालय से स्टे पर हूं

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