महेश स्वीट्स पर जाँच के दौरान पत्रकार ने किया कवरेज, संचालक को नगवारा गुजरा, मीडिया कर्मियों से ही कर लिया विवाद

महेश स्वीट्स पर जाँच के दौरान पत्रकार ने किया कवरेज, संचालक को नगवारा गुजरा, मीडिया कर्मियों से ही कर लिया विवाद

न्यूज़ बिलासपुर बंधु (संतोष साहू)

बिलासपुर- तारबाहर क्षेत्र में स्थित में महेश स्वीट्स के संचालक अपनी संस्था पर चल रही जांच को देख कर इतना बौखला गए कि कवरेज करने पहुंचे मीडिया कर्मी के साथ ही धक्का-मुक्की कर कैमरा बंद करने की धमकी देने लगे।.. इतना ही नहीं मीडिया को देख जांच के लिए पहुंचे खाद्य एवं औषधि निरीक्षक भी इतना घबरा गए कि मौके से ही भाग खड़े हुए।

त्योहारों के मद्देनजर इन दिनों खाद्य एवं औषधि विभाग और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम होटलों में जांच के लिए पहुंच रही है जहां पर मिठाइयों के सैंपल और तय नियमों पर कार्रवाई का काम अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है.. इसी तारतम्य में आज खाद्य एवं औषधि विभाग के निरीक्षक और खाद्य विभाग के निरीक्षकों की टीम तार बाहर स्थित महेश स्वीट्स में पहुंचे थे उन्होंने मिठाइयों पर एक्सपायरी डेट नहीं लिखे होने पर संचालक को फटकार लगाई और ऊपर मंजिल पर जांच के लिए गए तो मीडिया कर्मी छवि कश्यप और मनीष पाल को अधिकारियों के साथ देख दुकान संचालक इतना बौखला गया कि उनके साथ धक्का-मुक्की करने लगा इतना ही नहीं होटल संचालक ने छवि कश्यप के हाथ से कैमरा छीनने की भी कोशिश किया.. मीडियाकर्मियों से धक्का-मुक्की करते देख खाद्य और औषधि विभाग के निरीक्षक अपनी टीम के साथ वहां से रफूचक्कर हो गए ऐसे में सवाल उठता है कि.. आखिर जांच करने गए अधिकारी गलती पाने के बावजूद भी कार्रवाई करने की बजाय मौके से कैसे फरार हो गए।. बताया जाता है कि दुकान संचालक ने नियम के नाम पर मीडिया कर्मियों को डराने की खूब कोशिश किया लेकिन घटना की खबर लगते ही मौके पर बड़ी संख्या में मीडियाकर्मी पहुंच गए। माहौल खराब होते देख संचालक के लोग मीडियाकर्मियों से आगे का हाथ जोड़कर माफी मांगते नजर आए..

विभागीय अधिकारियों द्वारा मौके से भागना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिरकार रसूखदार होटल में जांच के नाम पर पहुंचने के बाद बिना कार्रवाई के वह क्यों वहां से भाग गए जबकि केंद्र सरकार ने 2 साल पहले ही नियम जारी कर मिठाइयों में बनाई गई तिथि के साथ एक्सपायरी डेट को भी प्रदर्शित करने का आदेश दिया है लेकिन शहर के लगभग सभी होटलों में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है बावजूद इसके खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारी कार्रवाई करने की बजाय उन्हें संरक्षण देने का काम कर रहे हैं।

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